Mid Day Meal Scheme (मीड डे मील योजना)

मीड डे मील योजना:

मीड डे मील योजना भारत सरकार तथा राज्य सरकार के द्वारा संयुक्त रूप से संचालित है| भारत सरकार द्वारा यह योजना 15 अगस्त 1995 को लागू की गयी थी ।

इसके अंतर्गत कक्षा 1 से 5 तक प्रदेश के परिषदीय/राज्य सरकार द्वारा सहायता प्राप्त प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले सभी बच्चों को 80 प्रतिशत उपस्थिति के आधार पर प्रति माह प्रति बच्चे को 03 किलोग्राम गेहूं अथवा चावल दिए जाने की व्यवस्था थी, किन्तु मा० सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में उत्तर प्रदेश में दिनांक 01 सितम्बर 2004 से पका पकाया मध्याह्न भोजन प्राथमिक विद्यालयों में आरम्भ की गई |

पके पकाए भोजन:

मीड डे मील योजना के अंतर्गत प्रत्येक छात्र को सप्ताह में 4 दिन चावल के बने भोज्य पदार्थ तथा 2 दिन गेहूं से बने भोज्य पदार्थ दिए जाने की व्यवस्था की गयी है, जो स्वादिष्ट और रुचिकर हो। प्राथमिक स्तर पर प्रति छात्र प्रति दिवस 100 ग्राम एवं उच्च प्राथमिक स्तर पर  प्रति छात्र प्रति दिवस 150 ग्राम की दर से खाद्यान्न (गेहूं/चावल) उपलब्ध कराया जाता है| प्राथमिक विद्यालयों में उपलब्ध कराये जा रहे भोजन में कम से कम 450 कैलोरी ऊर्जा व 12 ग्राम प्रोटीन एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कम से कम 700 कैलोरी ऊर्जा व 20 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध होना चाहिए|

परिवर्तन लागत:

मीड डे मील योजना के अंतर्गत भोजन बनाने के लिए परिवर्तन लागत की व्यवस्था की गयी है| परिवर्तन लागत से सब्जी, दाल, तेल, मसाले एवं अन्य सामग्रियों की व्यवस्था की जाती है| वर्तमान  में प्राथमिक स्तर पर रु० 4.97 प्रति छात्र प्रति दिवस (जिसमें रु० 1.99 राज्यांश है) तथा उच्च प्राथमिक स्तर पर रु० 7.45 प्रति छात्र प्रति दिवस (जिसमें रु० 2.98 राज्यांश है), परिवर्तन लागत के रूप में उपलब्ध कराया जाता है |

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